UNESCO World Heritage Sites in India

यूनेस्को विश्व विरासत स्थल UNESCO Heritage Of India At present there are 40 UNESCO World Heritage Sites in India.Out of 40 World Heritage Sites, there are 32 Cultural World Heritage Sites., 7 Natural World Heritage Sites & one mixed World Heritage Sites Cultural World Heritage Sites 🌹 Agra Fort, Agra (1983) 🌹Ellora Caves, Maharashtra (1983) […]

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उद्भासल कर्ण खोरठा एकांकी का हिंदी में अनुवाद

उपेक्षित कर्ण उद्भासाल कर्ण परिचय – लेखक – श्रीनिवास पानुरी भाषा: खोरठा लिपि – देवनागरी विषय: महाभारत में कर्ण का जीवन और युद्ध मुख्य पात्र: कुंती, कर्ण, भगवान सूर्य द्वारा लिखा गया एक खोरठा नाटक है। यह नाटक 1963 में लिखा गया था। और इसका पहला दृश्य कुंती को भगवान सूर्य से बात करते हुए […]

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शिवनाथ प्रमाणिक की जीवनी | Biography of shivnath Pramanik

Shivnath Pramanik शिवनाथ प्रमाणिक की जीवनी जन्म– 13 जनवरी 1950, बईदमारा गांव (बाघमारा) बोकारो पिता का नाम :- मुरलीधर प्रमाणिक माता का नाम :- तिनकी देवी शिक्षा :- 📕 इंटर [ डी ए वी चंद्रपुरा, बोकारो(1968 – 70) 📕 सनातक [ नीजी कॉलेज (1970-73) 📕 पत्रकारिता एवं लेबर ऑफिसर में डिप्लोमा( 1974) 📕गृह मंत्री […]

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Chero Tribe चेरो जनजाति

चेरो जनजाति विस्तृत अध्धयन | Chero Tribes Detailed Study

Tribes Of Jharkhand Chero Tribe चेरो जनजाति परिचय झारखंड में इसका मुख्य जमाव पलामू क्षेत्र में पाई जाती है। राँची और हज़ारीबाग जिले में भी इसकी अच्छी जनसंख्या है। ये स्वयं को च्यवन ऋषि के संतान मानते है। ये अपने को चौहान राजपूत मानते है। मुंडा और पुराणों की तरह ही करो भी अपने उपनाम […]

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kisan tribes किसान जनजाति

JPSC PT (Tribe 8) किसान जनजाति का विस्तृत अध्ययन | Detailed Study Of Kisan Tribes

किसान जनजाति Kisan Tribe किसान जनजाति परिचय – उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के baad झारखंड में किसान जनजाति की सबसे ज्यादा जनसंख्या है। ये परंपरागत किसान होते है तथा वन्य उत्पाद विशेषकर लकड़ी बेचकर अपनी जीविका चलाते है। झारखंड में इसका मुख्य जमाव लातेहार और गुमला जिला में है। इस जनजाति का मूल भाषा का […]

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राष्ट्रकूट वंश का इतिहास | History Of Rashtrakoot Dynasty

History Of Rashtrakut Dynasty राष्ट्रकूट वंश का इतिहास परिचय 753 ईसवी में दंतीदुर्गा ने चालुक्य वंश के अंतिम राजा कीर्तिवर्मन द्वितीय को पराजित करके स्वयं को स्वतंत्र राजा घोषित कर दिया था। दंतीदुर्गा के द्वारा ही राष्ट्रकूट वंश की स्थापना की गई थी जिस की प्रारंभिक राजधानी मयूरखिड़ी (महाराष्ट्र) में थी। बाद में अमोघवर्ष प्रथम […]

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बथुड़ी जनजाति Bathuri tribe

बथुड़ी जनजाति का विस्तृत अध्धयन | Batudi Tribes Detailed Study

Bathudi Tribes बथुड़ी जनजाति Bathuri Tribe परिचय बथुड़ी जनजाति की सबसे ज्यादा जनसंख्या उड़ीसा में पाई जाती है। इनका मूल निवास स्थान उड़ीसा के मयूरभंज के पंचपीर पठार और सिमलीपाल जंगल है। यहीं से आकर बथुड़ी झारखंड के पड़ोस सिंहभूम जिले में बसे। इसकी ज्यादा जनसंख्या स्वर्णरेखा नदी के तट और धालभूम पहाड़ी के आसपास […]

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JPSC PT (Tribal Administration 8) झारखंड के सभी जनजातियों के प्रशासनिक प्रधान एवं धार्मिक प्रधान

ग्रामीण प्रधान/धार्मिक प्रधान Religious Head Of Tribes यहां झारखंड में पाए जानेवाले विभिन्न जनजातियों के धार्मिक प्रधान और प्रशासनिक प्रधान दिया गया है:- जनजाति ग्रामीण प्रधान धार्मिक प्रधान संताल मांझी नायके उरांव महतो पाहन मुंडा मुंडा पाहन हो मुंडा देउरी खरवार मुखिया बैगा खड़िया महतो/डंडीया कालो/देउरी बिरहोर मालिक/नाये पाहन बंजारा नायक भगत बेदिया बिंझिया मादी/गड्डी […]

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चोल वंश का इतिहास | history of chola dynasty |history of medieval India | मध्यकालीन भारत का इतिहास

चोल वंश का इतिहास History of chola dynasty प्रारंभिक चोल का इतिहास प्रारंभिक चोल राजवंश का संस्थापक उर्वाहप्पहरें इलन जेत चेन्नी था। इसकी प्रारंभिक राजधानी पुहार थी। करिकाल प्रारंभिक चोल शासकों में सर्वाधिक शक्तिशाली और महत्वपूर्ण शासक था। इसे “जले हुए पैरों वाला” कहा गया है। अनुमानित किस शासक ने 190 ई में शासन किया […]

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सेन वंश का इतिहास | History Of Sain Dynasty

सेनवंश का इतिहास History Of Sain Dynasty परिचय सेन वंश के अभिलेखों के अनुसार सेन वंश के राजा मूलतः कर्नाटक के रहने वाले थे। सेन वंश की स्थापना सामंत सेन के द्वारा बंगाल के राढ नामक स्थान पर की गई थी। सेन वंश की राजकीय भाषा संस्कृत थी। इसकी प्रारंभिक राजधानी गौड़ (माल्दा जिला में) […]

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