मुंडारी साहित्य
मुंडारी भाषा परिचय – मुंडारी भाषा को “होड़ो जगार” (मनुष्य की वाणी) भी कहा जाता है। मुंडारी झारखंड के खूंटी, रांची, सरायकेला खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम जिले और ओडिशा के मयूरभंज, केंदुझार, सुंदरगढ़ जिले में बोली जाती है। मुंडारी भाषा के अनुवाद के लिए डॉ राम मुंडाजन जनवादी शोध संस्थान मोरहाबादी ने आर्टिफिशियल साइंस (एआई) टूल बनाया है। इसका नाम ‘आदिवाणी टूल’ है।
मुंडारी लिपि – मुंडा भाषा की लिपि मुंडारीवाणी है, इस लिपि में 27 अक्षर और 5 विशेषक हैं। इसे मुंडारी वर्णमाला, मुंडारी हिसिर, या नागमुंडारी भी कहा जाता है। इस लिपि को ओडिशा के मयूरभंज ज़िले के मुंडारी भाषाविद् रोहिदास सिंह नाग ने बनाया था। इस लिपि में प्राकृतिक आकृतियों को आधार बनाकर अक्षरों का निर्माण किया गया है। साल 2008 में भारत मुंडा समाज और मुंडारी समाज संवर जामदा की मदद से इस लिपि में सुधार किए गए।साल 2021 में इसे यूनिकोड में जोड़ा गया था।बैद्यनाथ सिंह ने मुंडारी बानी के लिए पांच टाइपफ़ेस तैयार किए हैं।

वर्गीकरण – यह ऑस्ट्रोएशियाटिक या ऑस्ट्रिक भाषा परिवार के अंतर्गत आता है । मुंडा भाषा के चार उपबोली पाई जाती है:-
1. नागूरी मुंडारी – यह खूंटी जिला के तोरपा और कर्रा ब्लॉक में बोला जाता है और सिमडेगा के कोलेबिरा, बानो क्षेत्र में बोला जाता है ।
2. केर मुंडारी – यह रांची के आसपास के क्षेत्रों में बोली जाती है ।
3. तमाड़ीया मुंडारी- तमाड़ के आसपास में बोली जाती है ।
4. हसद मुंडारी – खूंटी और मुरहू क्षेत्रों में बोली जाती है ।
प्रसिद्ध मुंडारी पुस्तक इंग्लिश में
1. An introduction to the mundari language – Rakhal Das (1871)
2. Mundari Primer – JC Whittley (1873)
3. Rudiments Of A Mundari Grammer- SJD Smet
4. A Mundari Start Reader – John Hoffman (1893)
5.Mundari Grammar – John Hoffman (1903)
6. A mundari Grammar With Exercise – John Hoffman
7. Horo Doranko – Maulvi Abdul Wali (1907)
8.The Mundas & Their Countriy – SC Roy (1912)
9. Encyclopaedia Mundrika (1915)
John Hoffman (यह 16 खंडो में इंग्लिश में लिखा गया मुंडाओं के जीवन पर आधारित मुंडारी भाषा में सबसे बड़ा ग्रंथ है।)। इसे मुंडारी भाषा साहित्य का विश्वकोष माना जाता है।
Note:- मेनस आड़ेया जॉन हॉफमेन के टाइपिस्ट थे जिन्होंने इस किताब को टाइप किया था। जब प्रथम विश्वयुद्ध की शुरुआत हुई तो अंग्रेजो ने जॉन हॉफमेन को भारत से जाने का आदेश दिया क्योंकि ये अंग्रेजो के शत्रु देश जर्मनी के निवासी थे। बाद में एनसाइक्लोपीडिया ऑफ मुंडारिका पुस्तक का अंतिम रूप मेनन्स आड़ेया ने दिया था। मेनन्स आड़ेया को भारत का पहला आदिवासी लेखक लेखक के रूप में जाना जाता है जिसने 1920 में “मतूरा कहानी” उपन्यास को लिखा मगर इस उपन्यास का प्रकाशन 1984 में किया गया।
इस उपन्यास में मतुरा मुंडा मुख्य पात्र के रूप में है। मतूरा कहानी एक 1700 पृष्ठों जो पाँच भाग में लिखा गया वृहत उपन्यास है। इसकी अंतिम भाग का अनुवाद हिंदी में इसके पुत्र पेत्रुस आड़ेया ने “चाय बागान” नाम से किया है।
10. Munda Community – SC Roy (1928)
11. Mundari English Dictionary – MB Bhaduri (1931)
12. Mundari Durang – D Hans (1942)
13. Notes On The Phonology Of Mundari- Jhon Gumperz (1957)
14. Not Without Witness – D Hans (1954)
15. The Mundas & Oraon Of Chhota Nagpur – Philip Ekka (1960)
16.A Descriptive Analysis Of Mundari – Walter Cook (1966)
17.Munda and Indonesia – FBJ Kuiper
18. Aspects Of Munda Verb – Dr Ram Dayal Munda
19. The Jharkhand Movement – Ram Dayal Munda
20. Mundari Jadur Song – Ramdayal Munda
21. Some Formal Features Of Traditional Mundari Poetry – Dr Ram Dayal Munda
22.Mundari Phone Click Reader – N K Sinha
23.Munda Mundari German grammar – A Notrot
24.Descriptive Dialogue Dong In Mundari – Norman Zide
25. Culture Change In Tribal Bihar(Munda and Oraon)- Sachidanand
26. The copual Change In Mundari: Foundation of language – D terrence
27. Mundari As A Flexible Language – Kees & Jan Rijkhoff
28. The demonstrative system in Munda – Tosiki Osada (Tokyo University)
29. Mundari Bible- A Notrot
30. Mundari Folktale – PK MITRA
31. Munda Durang – WC Archer
देवनागरी लिपि में मुंडारी साहित्य
1.झारखंड में ग्राम स्वराज – रामदयाल मुंडा
2.मुंडारी संक्षिप्त व्याकरण – मनमसीह मुंडू
3.मुंडारी सीखने का सरल व्याकरण – जोसेप टोपनो
4.मुंडारी सरल शिक्षा- जे सी तिलमिड़
5.छोटा नागपुर के आदिवासी – जोशेप टोपनो
6.मुंडारी हिंदी शब्दकोश- स्वर्णलता प्रसाद
7. बज रही बांसुरी – जगदीश त्रिगुणायत (इस पुस्तक में उरावं वीरांगना सिनई दई और कइली दई की मुगलों पर वीरता का वर्णन है।
8. सोसो बोंगा –जगदीश त्रिगुणायत – यह बैलेड रूप (लोकगाथा) में है। सोसो बोंगा मुंडा समुदाय का सबसे पवित्र लोक कथा है। इसमें इसकी उत्पत्ति,संस्कृति, विकास और परंपराओं का वर्णन मिलता है। इसी लोक कथा को जगदीश त्रिगुनायत ने लिपिबद्ध किया है।
9. बिरसा भगवान (नाटक) – सुखदेव बरदियार
10. चंगा दुरँग – बलदेव मुण्डा
11. आदि धरम – रामदयाल मुंडा
12. सेलेद (अर्थात miscellaneous) – रामदयाल मुंडा
13. हिसिर (गीत संग्रह) – रामदयाल मुंडा
14. ई नवा कानिको ( मतलब 7 नई स्टोरी) – रामदयाल मुंडा
15. सोसो बोंगा – रामदयाल मुंडा
16.सोसो बोंगा (भेेलवा पूजन) – रामदयाल मुंडा
17. अडांडी बोंगा (विवाह गीत) – रामदयाल मुंडा
18. गोनोए:परोमेंन बोंगा (श्राद्ध गीत) – रामदयाल मुंडा
19. बा बोंगा (सरहुल गीत ) – रामदयाल मुंडा
20. जी-तोनोल (मन बंधन) – रामदयाल मुंडा
21. जी-रानारा (मन बिछड़न) – रामदयाल मुंडा
22. मुण्डारी पाठ – रामदयाल मुंडा
23. प्रीतपाला और रामायणपाला – रामदयाल मुंडा
मुण्डारी पत्रिका
आदिवासी सकम (आदिवासी आवाज)
सरना सकम ( सरना आवाज) –अर्द्ध-वार्षिक, भईयाराम मुंडा, सुशील कुमार बागे द्वारा संपादित
नीतिर सकम – सुशील कुमार बागे द्वारा संपादित
जगर सड़ा – मासिक, सुशील कुमार बागे द्वारा संपादित
मरसल (उजाला) – एन ई होरो द्वारा संपादित , मासिक पत्रिका
एयोम (जागरण) – अर्द्ध -वार्षिक, राँची से प्रकाशित
जवा डाली – त्रैमासिक पत्रिका, राँची से प्रकाशित
समपड़तिअ (श्रृंगार) – मासिक पत्रिका, दिलावर हंस द्वारा संपादित
जोहार – मासिक पत्रिका, दिलावर हंस द्वारा संपादित
बा: गहनालाअ (फूल गुच्छा)- वार्षिक पत्रिका, राँची से प्रकाशित
सनंअ (चाहत)- मासिक पत्रिका, सिलास हेम रोम द्वारा प्रकाशित
संगोम- मासिक पत्रिका, वीरेंद्र कुमार सोय द्वारा प्रकाशित
उलगुलान – मासिक पत्रिका
आदिवासी – सप्ताहिक, निहार सरकार द्वारा राँची से प्रकाशित
डहर – छोटानागपुर सांस्कृतिक संघ द्वारा प्रकाशित
बिहान पत्रिका – बुंडू से प्रकाशित
सेंड़ा सेतेअ – नवीन मुंडू द्वारा प्रकाशित
हमको बीएड के लिए पाठ योजना चाइए