नागपुरी भाषा परिचय
परिचय –झारखंड में सदानों की सर्वप्रमुख भाषा है नागपुरी। नागपुरी को सादरी या गवांरी भाषा भी कहा जाता है। यह नागवंश और रामगढ़ राज्य की राजभाषा थी। नागवंशी राजा रघुनाथ शाह और रामगढ़ के राजा दलेल सिंह खुद नागपुरी साहित्य के रचनाकार थे। नागपुरी के लिए कैथी लिपि या देवनागरी लिपि का प्रयोग किया जाता है। रघुनाथ नृपति को नागपुरी के प्रथम कवि माना जाता है। बाद में हनुमान सिंह, सोबरन साय,जय गोविन्द, संत घासी, घासीराम, कंचन, धनी राम बक्शी, फादर पीटर शांति नवरंगी, शारदा प्रसाद सिन्हा, प्रफुल्ल चंद्र राय, विश्वेशर प्रसाद केसरी, साहनी उपेंद्र पाल, नईमुद्दीन मिरदाहा, लाल रण विजय नाथ शाहदेव, मधु मंसूरी हँसमुख, मुकुंद नायक, प्रमोद कुमार राय, कृष्ण प्रसाद साहू, गिरधारी राम गोंझु ,कलाधर आदि लेखकों ने रघुनाथ नृपति के विचार को आगे बढ़ाया। नागपुरी के लोक साहित्य और शिष्ट साहित्य विकसित अवस्था में है।
नागपुरी में प्रथम
1. नागपुरी का पहला उपन्यास चकरी (1979- 80)- चकरी है जिसके रचयिता बड़ाइक ईश्वरी प्रसाद थे।
2. नागपुरी का पहला नाटक नारद मोह लीला (1956) है।
नाटककार – सहनी उपेंद्र पाल नहन
3. नागपुरी कर पहला लिखित कहानी “कहनी कर नांव मोहों बुझोना” है लेखक- अभिनंदन राम झरनो
नागपुरी साहित्य के संस्थान
📝नागपुरी भाषा परिषद्, रांची
📝नागपुरी (शोध एवं प्रशिक्षण) संस्थान, पिथोरिया
📝झारखंड कला संगम
📝नागपुरी प्रचारिणी सभा
📝छोटानगपुर सांस्कृतिक संघ
नागपुरी के भाषा-परिवार
हिंद-यूरोपियन ➡हिंद-ईरानी ➡हिन्द-आर्य➡पूर्वी समूह➡ बिहारी ➡ नागपुरी
जॉर्ज ग्रियर्सन ने अपनी पुस्तक ” Linguistic Survey Of India” में नागपुरी को भोजपूरी भाषा की उपबोली कहा है। प्रोफेसर केसरी प्रसाद सिंह ने अपनी रचना “नागपुरी भाषा साहित्य” में नागपुरी को मागधी भाषा का अपभ्रंश कहा है। डाक्टर श्रवण कुमार गोस्वामी की रचना “नागपुरी शिष्ट साहित्य” में नागपुरी को अर्द्धमागधी का अपभ्रंश कहा है।
नागपुरी के प्रसिद्ध पुस्तक
1. Notes On The Ganwari Dialect Of Lohardagga, Chhotanagpur (1896)- इस पुस्तक की रचना ई एच व्हिटली ने किया। इस पुस्तक को संशोधित करके 1916 में “Notes On The Nagpuria Sadani Language” के नाम से प्रकाशित किया गया। इस पुस्तक को नागपुरी का प्रथम व्याकरण माना जाता है।
2. Grammer Of The Nagpuria Sadani Language – कोनराड बुकाउट (1906)
3. Language Handbook Of Sadani –हेनरिक फ्लोर 1931
4. नागवंशवाली – बेनीराम महथा, इस किताब से ही हमे नागवंश के सारे राजाओं की सूची मिलती है।
5. घासीराम माहली – नागपुरी फाग शतक, ललना रंजन, दुर्गा सप्तशती, झूमर, वंशावली, बरहामासा, विवाह परीछन
Note :- घासीराम माहली का उपनाम महाकवि है। ये रातु महाराज (नागवंशी राजा) के दरबार में कवि थे।
6. कंचन – महाभारत, लंका-काण्ड, ऊषा-हरण, सुदामा चरित, कृष्ण चरित
7. धनी राम बक्शी- जातिया कहानी, फोगलो बुढ़िया कर कहानी, श्री गणेश चौठ कहानी, श्रीकृष्ण चरित, नारद मोह लीला, करम महात्मय
8.प्रफुल्ल कुमार राय – सोनझइर (कहानी संग्रह),बरखा, बरखा बूँद, नागपुरी कवि, अवसर नी मिले बुझु, किलकिला
9. श्रवण कुमार गोस्वामी – सेवा अउर नोकरी, तेईतर कर छांव, दु डाइर बिस फूल
10. गिरधारी राम गौंझू – मरांग गोमके: जयपाल सिंह ,महाराजा मदरा मुंडा
11. बी पी केसरी – नेरुआ लोटा उर्फ सांस्कृतिक अवधारणा, कांटी (कहानी संग्रह), ठाकुर विश्वनाथ शाही
12.इग्नेस कुजूर- झारखण्ड के दो मुहाने
13. हरिनंदन राम – भाइगे बांचलक जिया मोर
14. हुलास राम – महाकवि घासीराम का पुत्र
15. दृगपालराम देवघरिया- नल-चरित्र, कोराम्बे उपाख्यान
16.रामकुमार तिवारी – मानक नागपुरी, रद्दी कागज
17. हुलास राम – महाकवि घासीराम का पुत्र
18. नईमुद्दीन मिरदाहा – मेंजूर पाईख
19. सुशील कुमार लाल – करम के फेर, आमकोयल, नोकरी का फेर
21.काली कुमार सुमन – खुखड़ी रुगड़ा
22. ईश्वरी प्रसाद सिंह – काका कर कहानी
नागपुरी पत्रिका
झारखण्ड आराधना –1915 में गोस्सनर मिशन द्वारा नागपुरी मासिक पत्रिका “झारखण्ड आराधना” की शुरुवात की गई थी।
मसाल – नागपुरी की प्रसिद्ध कविता “मसाल” है जिसमे गांधीजी, पांडवो और रावण की चर्चा है।
6. संत कुमार पांडेय की प्रसिद्ध नागपुरी कविता “वन” है।
7. गोतिया और जोहार सहिया ये मासिक पत्रिका राँची से नागपुरी में प्रकाशित होती है।
झारखंड –ईश्वरी प्रसाद सिंह ने 1938 में “झारखंड” मासिक पत्रिका का संपादन शुरू किया।
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